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स्कूल शिक्षा का भविष्य

स्कूल शिक्षा का भविष्य तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तनों और वैश्विक बदलावों के कारण बहुत ही रोमांचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। कुछ प्रमुख बदलाव जो आने वाले समय में हो सकते हैं, वे इस प्रकार हैं: प्रौद्योगिकी का उपयोग : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन शिक्षा, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का स्कूल शिक्षा में एक महत्वपूर्ण स्थान होगा। बच्चों को इंटरेक्टिव, कस्टमाइज्ड और पर्सनलाइज्ड शिक्षा मिल सकेगी। स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग, और आभासी कक्षाएं एक सामान्य तरीका बन सकती हैं। कौशल आधारित शिक्षा : भविष्य में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यावसायिक कौशल, समस्या सुलझाने की क्षमता, और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना होगा। ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे जो जीवन कौशल, संवाद कौशल, और प्रौद्योगिकियों के बारे में गहरे ज्ञान को शामिल करेंगे। समावेशी और व्यक्तिगत शिक्षा : शिक्षा में विविधता और समावेशिता पर जोर दिया जाएगा, ताकि सभी छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार शिक्षा मिल सके। इससे बच्चों के शैक्षिक और मानसिक विकास में मदद मिलेगी, चाहे वे किसी भी सामाजिक या भौगोलिक पृष्...

तीसरी कसम, उर्फ एक मारे गए गुलफ़ाम (कहानी)

कहानी- मारे गये ग़ुलफाम, उर्फ तीसरी कसम  लेखक- फणीश्वरनाथ रेणु  मुख्य पात्र- हिरामन( ग्रामीण गाड़ीवान), हिराबाई(नौटंकी कंपनी में काम करनेवाली)  गौण पात्र- धुन्नीराम, लालमोहर, पलटदास, लसनवाँ कहानी का विषय- नायक का तीन कसमें लेना, नौटंकी कंपनी में काम करनेवाली, स्त्री का दर्दभरा जीवन, अव्यक्त और अस्वीकृत प्रेम की कथा। हिरामन ४० साल का सीधा-सादा गाड़ीवान है जो  भैया- भाभी के साथ रहता है। इस कहानी में हीरामन तीन कसमें खाता है पहली कसम चोरी का या चोरी बाजार का माल अपनी गाड़ी में नहीं रखेगा, दूसरी कसम बास की लद्दी न लादने की, तीसरी कसम कंपनी की औरत को न बिठाने की।  इस कहानी पर फिल्मातंरण भी हुआ है १९६६ में। फिल्म के निर्माणकर्ता शैलेंद्र थे और निर्देशन बासु भट्टाचार्य ने किया था।  फिल्म की मुख्य भूमिका अदा राजकपूर और वहिदा रहमान ने की। कहानी का आरंभ   हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है... पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन। बैलगाड़ी। सीमा के उस पार, मोरंग राज नेपाल से धान और लकड़ी ढो चुका है। कंट्रोल के जमाने में चोरबाजारी का माल इस पार से उस पार...

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