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स्कूल शिक्षा का भविष्य

स्कूल शिक्षा का भविष्य तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तनों और वैश्विक बदलावों के कारण बहुत ही रोमांचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। कुछ प्रमुख बदलाव जो आने वाले समय में हो सकते हैं, वे इस प्रकार हैं: प्रौद्योगिकी का उपयोग : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन शिक्षा, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का स्कूल शिक्षा में एक महत्वपूर्ण स्थान होगा। बच्चों को इंटरेक्टिव, कस्टमाइज्ड और पर्सनलाइज्ड शिक्षा मिल सकेगी। स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग, और आभासी कक्षाएं एक सामान्य तरीका बन सकती हैं। कौशल आधारित शिक्षा : भविष्य में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यावसायिक कौशल, समस्या सुलझाने की क्षमता, और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना होगा। ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे जो जीवन कौशल, संवाद कौशल, और प्रौद्योगिकियों के बारे में गहरे ज्ञान को शामिल करेंगे। समावेशी और व्यक्तिगत शिक्षा : शिक्षा में विविधता और समावेशिता पर जोर दिया जाएगा, ताकि सभी छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार शिक्षा मिल सके। इससे बच्चों के शैक्षिक और मानसिक विकास में मदद मिलेगी, चाहे वे किसी भी सामाजिक या भौगोलिक पृष्...

शिवशंभू के चिट्ठे (निबंध), बालमुकुंद गुप्त

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निबंध - शिवशंभु के चिट्ठे  लेखक - बालमुकुंद गुप्त  प्रकाशन - १९०४ में भारतमित्र में हुआ यह निबंध व्यंग्यात्मक निबंध है। इस निबंध में ८ लार्ड कर्जन को, २ लार्ड मिण्टो,  भारत सचिव मि० मार्ली,  शाहिस्ते खाँ, अलिगढ़ के छात्रों, सर सहमद अहमद लाला यशवंतराय को लिखे है।  माई लार्ड! लड़कपनमें इस बूढ़े भंगड़को बुलबुलका बड़ा चाव था। गांवमें कितने ही शौकीन बुलबुलबाज थे। वह बुलबुलें पकड़ते थे, पालते थे और लड़ाते थे, बालक शिवशम्भु शर्मा बुलबुलें लड़ानेका चाव नहीं रखता था। केवल एक बुलबुलको हाथपर बिठाकरही प्रसन्न होना चाहता था। पर ब्राह्मणकुमारको बुलबुल कैसे मिले? पिताको यह भय कि बालकको बुलबुल दी तो वह मार देगा, हत्या होगी। अथवा उसके हाथसे बिल्ली छीन लेगी तो पाप होगा। बहुत अनुरोधसे यदि पिताने किसी मित्रकी बुलबुल किसी दिन ला भी दी तो वह एक घण्टेसे अधिक नहीं रहने पाती थी। वह भी पिताकी निगरानीमें। सरायके भटियारे बुलबुलें पकड़ा करते थे। गांवके लड़के उनसे दो दो तीन तीन पैसेमें खरीद लाते थे। पर बालक शिवशम्भु तो ऐसा नहीं कर सकता था। पिताकी आज्ञा बिना वह बुलबुल कैसे लावे और...

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