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स्कूल शिक्षा का भविष्य

स्कूल शिक्षा का भविष्य तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तनों और वैश्विक बदलावों के कारण बहुत ही रोमांचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। कुछ प्रमुख बदलाव जो आने वाले समय में हो सकते हैं, वे इस प्रकार हैं: प्रौद्योगिकी का उपयोग : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन शिक्षा, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का स्कूल शिक्षा में एक महत्वपूर्ण स्थान होगा। बच्चों को इंटरेक्टिव, कस्टमाइज्ड और पर्सनलाइज्ड शिक्षा मिल सकेगी। स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग, और आभासी कक्षाएं एक सामान्य तरीका बन सकती हैं। कौशल आधारित शिक्षा : भविष्य में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यावसायिक कौशल, समस्या सुलझाने की क्षमता, और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना होगा। ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे जो जीवन कौशल, संवाद कौशल, और प्रौद्योगिकियों के बारे में गहरे ज्ञान को शामिल करेंगे। समावेशी और व्यक्तिगत शिक्षा : शिक्षा में विविधता और समावेशिता पर जोर दिया जाएगा, ताकि सभी छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार शिक्षा मिल सके। इससे बच्चों के शैक्षिक और मानसिक विकास में मदद मिलेगी, चाहे वे किसी भी सामाजिक या भौगोलिक पृष्...

हरि घास पर क्षणभर(कविता)

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कविता- हरि घास पर क्षणभर कवि- अज्ञेय रची गई -  14 अक्टूबर 1949 को प्रकाशित हुई - 1949 को  कविता का आरंभ  आओ बैठें इसी ढाल की हरी घास पर। माली-चौकीदारों का यह समय नहीं है, और घास तो अधुनातन मानव-मन की भावना की तरह सदा बिछी है-हरी, न्यौती, कोई आ कर रौंदे। आओ, बैठो तनिक और सट कर, कि हमारे बीच स्नेह-भर का व्यवधान रहे, बस, नहीं दरारें सभ्य शिष्ट जीवन की। चाहे बोलो, चाहे धीरे-धीरे बोलो, स्वगत गुनगुनाओ, चाहे चुप रह जाओ- हो प्रकृतस्थ : तनो मत कटी-छँटी उस बाड़ सरीखी, नमो, खुल खिलो, सहज मिलो अन्त:स्मित, अन्त:संयत हरी घास-सी। क्षण-भर भुला सकें हम नगरी की बेचैन बुदकती गड्ड-मड्ड अकुलाहट- और न मानें उसे पलायन; क्षण-भर देख सकें आकाश, धरा, दूर्वा, मेघाली, पौधे, लता दोलती, फूल, झरे पत्ते, तितली-भुनगे, फुनगी पर पूँछ उठा कर इतराती छोटी-सी चिड़िया- और न सहसा चोर कह उठे मन में- प्रकृतिवाद है स्खलन क्योंकि युग जनवादी है। क्षण-भर हम न रहें रह कर भी : सुनें गूँज भीतर के सूने सन्नाटे में किसी दूर सागर की लोल लहर की जिस की छाती की हम दोनों छोटी-सी सिहरन हैं- जैसे सीपी सदा सुना करती है।...

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