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स्कूल शिक्षा का भविष्य

स्कूल शिक्षा का भविष्य तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तनों और वैश्विक बदलावों के कारण बहुत ही रोमांचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। कुछ प्रमुख बदलाव जो आने वाले समय में हो सकते हैं, वे इस प्रकार हैं: प्रौद्योगिकी का उपयोग : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन शिक्षा, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का स्कूल शिक्षा में एक महत्वपूर्ण स्थान होगा। बच्चों को इंटरेक्टिव, कस्टमाइज्ड और पर्सनलाइज्ड शिक्षा मिल सकेगी। स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग, और आभासी कक्षाएं एक सामान्य तरीका बन सकती हैं। कौशल आधारित शिक्षा : भविष्य में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यावसायिक कौशल, समस्या सुलझाने की क्षमता, और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना होगा। ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे जो जीवन कौशल, संवाद कौशल, और प्रौद्योगिकियों के बारे में गहरे ज्ञान को शामिल करेंगे। समावेशी और व्यक्तिगत शिक्षा : शिक्षा में विविधता और समावेशिता पर जोर दिया जाएगा, ताकि सभी छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार शिक्षा मिल सके। इससे बच्चों के शैक्षिक और मानसिक विकास में मदद मिलेगी, चाहे वे किसी भी सामाजिक या भौगोलिक पृष्...

संस्कृति और सौंदर्य(निबंध), नामवर सिंह

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निबंध - संस्कृति और सौंदर्य  निबंधकार - नामवर सिंह  नामवर सिंह ने इस निबंध में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के फूल और रामधारी सिंह दिनकर संस्कृति के चार अध्याय के बारे में बताया है।  निबंध का आरंभ  'अशोक के फूल' केवल एक फूल की कहानी नहीं, भारतीय संस्‍कृति का एक अध्‍याय है; और इस अध्‍याय का अनंगलेख पढ़नेवाले हिंदी में पहले व्‍यक्ति हैं हजारीप्रसाद द्विवेदी। पहली बार उन्‍हें ही यह अनुभव हुआ कि 'एक-एक फूल, एक-एक पशु, एक-एक पक्षी न जाने कितनी स्‍मृतियों का भार लेकर हमारे सामने उपस्थित है। अशोक की भी अपनी स्‍मृति-परंपरा है। आम की भी है, बकुल की भी है, चंपे की भी है। सब क्‍या हमें मालूम है? जितना मालूम है उसी का अर्थ क्‍या स्‍पष्‍ट हो सका है?' अब तो खैर हिंदी में फूलों पर 'ललित' लेख लिखनेवाले कई लेखक निकल आए हैं, लेकिन कहने की आवश्‍यकता नहीं कि 'अशोक के फूल' आज भी अपनी जगह है। का‍लिदास के प्रेमी पंडितों को पहली बार इस रहस्‍योद्घाटन से अवश्‍य ही धक्‍का लगा होगा कि जिस कवि को वे अब तक अपनी आर्य संस्‍कृति का महान गायक समझते आ रहे थे वह गंधर्व, यक्ष, क...

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