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स्कूल शिक्षा का भविष्य

स्कूल शिक्षा का भविष्य तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तनों और वैश्विक बदलावों के कारण बहुत ही रोमांचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। कुछ प्रमुख बदलाव जो आने वाले समय में हो सकते हैं, वे इस प्रकार हैं: प्रौद्योगिकी का उपयोग : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन शिक्षा, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का स्कूल शिक्षा में एक महत्वपूर्ण स्थान होगा। बच्चों को इंटरेक्टिव, कस्टमाइज्ड और पर्सनलाइज्ड शिक्षा मिल सकेगी। स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग, और आभासी कक्षाएं एक सामान्य तरीका बन सकती हैं। कौशल आधारित शिक्षा : भविष्य में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यावसायिक कौशल, समस्या सुलझाने की क्षमता, और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना होगा। ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे जो जीवन कौशल, संवाद कौशल, और प्रौद्योगिकियों के बारे में गहरे ज्ञान को शामिल करेंगे। समावेशी और व्यक्तिगत शिक्षा : शिक्षा में विविधता और समावेशिता पर जोर दिया जाएगा, ताकि सभी छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार शिक्षा मिल सके। इससे बच्चों के शैक्षिक और मानसिक विकास में मदद मिलेगी, चाहे वे किसी भी सामाजिक या भौगोलिक पृष्...

योजक, योजक की परिभाषा, योजक के भेद

आपका स्वागत है हिंदी साहित्य और लेखनकला में  आज हम योजक की परिभाषा, भेद और उदाहरण को पढ़ेंगे  १) योजक किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित समझाइए। उत्तर - जो शब्द दो या दो से अधिक शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ने या मिलाने का कार्य करते हैं, उन्हें योजक कहते हैं। इन शब्दों को समुच्चय बोधक भी कहा जाता है। जैसे-  रीना और टीना साथ साथ खेलेंगी।    इस वाक्य में 'और' शब्द योजक है। २) योजक शब्द के कितने भेद हैं? उत्तर - योजक शब्दों के मुख्यत: तीन भेद हैं -  * संयोजक      *विभाजक    *विकल्पसूचक। ३) संयोजक योजक शब्द की परिभाषा उदाहरण सहित  दीजिए। उत्तर - जो योजक शब्द वाक्यांशों, शब्दों या वाक्यों को मिलाने या समानता बताने का काम करते हैं, संयोजक योजक शब्द कहलाते हैं। जैसे- और, तथा, एवं,व  आदि। उदाहरण- मोहन और सोहन भाई हैं। ४) विभाजक और विकल्पसूचक योजक शब्दों की परिभाषा उदाहरण सहित दीजिए। जो योजक शब्द भेद प्रकट करते हुए भी शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को मिलाएं उन्हें विभाजक कहते हैं  जैसे- परंतु, किंतु, मगर,  ताकि, इसलिए, ...

मुहावरा किसे कहते है? लोकोक्ति किसे कहते है? मुहावरा और लोकोक्ति में क्या अंतर है?

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नमस्कार साथियों 🙏 आशा  करती हूँ आप सब अच्छे होंगे और अपने जीवन को और अच्छा बनाने के लिए निरंतर प्रयत्न कर रहे होंगे। अब पढाई  की बात करते है आज हम मुहावरे और लोकोक्ति के बारे में पढ़ेंगे।   * मुहावरा किसे कहते है?  * लोकोक्ति किसू कहते है? * मुहावरा और लोकोक्ति में क्या अंतर है?   मुहावरा किसे कहते हैं? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए। जब कोई वाक्यांश अपने शाब्दिक या सामान्य अर्थ का बोध ना कराकर किसी विशेष अर्थ का बोध कराता है, जब उसे मुहावरा कहते हैं। इसके प्रभाव से भाषा में सजीवता, सुंदरता तथा स्पष्टता आ जाती है और भाषा का अर्थ प्रभाव भी बढ़ जाता है जैसे- पुलिस को आता देख उपद्रवी नौ दो ग्यारह हो गए। यहां 'नौ दो ग्यारह होने' का अर्थ भाग जाना है  लोकोक्ति किसे कहते हैं? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए। सामाजिक जीवन में अनुभव के आधार पर प्रचलित उक्ति को लोकोक्ति कहा जाता है लोकोक्तियां प्राय: पूर्ण वाक्य में होती है। जैसे-  अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता  यहां पूरी लोकोक्ति का अर्थ है कि अकेला व्यक्ति किसी बड़े कार्य को करने में समर्थ नहीं होता है। ...

रिपोर्ताज

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रिपोर्ताज रिपोर्ताज गद्य की अत्याधुनिक विधा है । इसका विकास सन 1936 ईस्वी के बाद द्वितीय विश्व युद्ध के समय पश्चात्य प्रभाव से हुआ । रिपोर्ताज में लेखन किसी घटना का विवरण साहित्यिक शैली में इस प्रकार प्रस्तुत करता है कि जिसे पढ़कर पाठक भावविभोर हो जाता है। हिंदी में रिपोर्ताज विधा के जनक शिवदान सिंह चौहान माने जाते हैं। इनका प्रथम रिपोर्ताज 'लक्ष्मीपुरा', 'रूपाभ' पत्रिका (1938 ई) में प्रकाशित हुआ था। रिपोर्ताज के प्रचार-प्रसार में 'हंस' पत्रिका का सर्वाधिक योगदान है। इसी पत्रिका में शिवदान सिंह चौहान ने 'मौत के खिलाफ जिंदगी की लड़ाई' शीर्षक रिपोर्ट लिखा था जिसमें स्वतंत्रता पूर्व देश की स्थिति का विवरण है। 'हंस' पत्रिका में 'समाचार और विचार' तथा 'अपना देश' स्तंभों के अंतर्गत विभिन्न लेखकों के रिपोर्ताज प्रकाशित होते रहे।  'विशाल भारत' में रांगेयराघव के  रिपोर्ताज 'अदम्य जीवन' शीर्षक से प्रकाशित होते थे  द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में भयंकर अकाल पड़ा और महामारी का प्रकोप भी हुआ। रांगेयराघव भयानक ...

गद्यकाव्य

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गद्यकाव्य 'गद्यकाव्य' गद्य की ऐसी विधा है, जिसमें कविता जैसी रसमयता,  रमणीयता, चित्रात्मकता और संवेदनशीलता होती है । हिंदी में रायकृष्णदास गद्यकाव्य के जनक माने जाते हैं।इन्होंने अनेक आध्यात्मिक गद्यकाव्यों की रचना की। गद्यकाव्य की सर्वप्रथम रचना रामाकृष्णदास की 'साधना' (1916 ई) है।  साधना, संलाप, प्रवाल, छायावाद आदि रामाकृष्ण दास के मुख्य गद्यकाव्य संग्रह है। गद्यकाव्य, रचना की प्रणाम रवींद्रनाथ टैगोर की 'गीतांजलि' के हिंदी अनुवाद से प्राप्त हुई। गद्यकाव्य का क्रमबद्ध लेखन छायावाद युग से आरंभ होता है और छायावाद युग में ही पूर्ण विकास लक्षित होता है। कुछ आलोचकों ने भारतेंदु को ही इस विधा का जनक माना है। प्रेमघन जगमोहन सिंह आदि भारतेंदु के सहयोगियों की रचनाओं में गद्यकाव्य की झलक मिलती है। बृजनंदन सहाय के 'सौन्दर्योपासक' को हिंदी का प्रथम गद्य काव्य माना जाता है। राजा राधिकारमण प्रसाद ने 'प्रेमलहरी' तथा लक्ष्मी-नारायण सिंह 'सुधांशु' ने 'वियोग' नामक गद्यकाव्य की रचना की।  वियोगीहरि के गद्यकाव्यों में 'भक्तितत्व' ...

महादेवी वर्मा का परिचय

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महादेवी वर्मा का परिचय   (क) काव्य संग्रह 1. नीहार-1930 ई. 2. रश्मि – 1932 ई. 3. नीरजा – 1935 ई. 4. सांध्यगीत -1936 ई. 5. दीपशिखा – 1942 ई. 6. सप्तपर्णा – 1960 ई.  ट्रिकः नेहा रानी सादी सप्त  प्रसिद्ध गद्य रचनाएँ – 1. स्मृति की रेखाएँ 2. पथ के साथी 3. शृंखला की कङियाँ 4. अतीत के चलचित्र  (ख) समेकित काव्य संग्रह 1. यामा – 1940 ई. (इसमें नीहार, रश्मि, नीरजा और सांध्यगीत रचनाओं में संगृहीत सभी गीतों को समेकित रूप में एक जगह संकलित कर दिया गया है।) पुरस्कार – 1. इस ’यामा’ रचना के लिए इनको 1982 ई. में ’भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार’ एवं ’मंगलाप्रसाद पारितोषिक’ प्राप्त हुआ था। 2. ’नीरजा’ रचना के लिए ’सेकसरिया पुरस्कार’ मिला था। विशेष तथ्य – ⇒ महादेवी वर्मा को ‘हिन्दी की विशाल मन्दिर की वीणा पाणी’ कहा जाता है। ⇒ ‘इस वेदना को लेकर उन्होंने हृदय की ऐसी अनुभूतियाँ सामने रखी जो लोकोत्तर है। कहाँ तक वे वास्तविक अनुभूतियाँ है और कहाँ तक अनुभूतियों की रमणीय कल्पना ,यह नहीं कहा जा सकता।’- महादेवी के सन्दर्भ में यह कथन किसका है ? ⇒ आचार्य शुक्ल 1. ये आरंभ में ब्रज भाषा म...

भेंटवार्ता (साक्षात्कार)

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भेंटवार्ता (साक्षात्कार)  भेंटवार्ता (साक्षात्कार) विधा का आरंभ पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से हुआ।  हिंदी में इस विधा का सूत्रपात बनारसीदास चतुर्वेदी द्वारा हुआ।  बनारसीदास चतुर्वेदी का 'विशाल भारत' (सितम्बर 1931 ई)  में 'रत्नाकरजी से बातचीत ' शीर्षक साक्षात्कार प्रकाशित हुआ।  बनारसीदास चतुर्वेदी का दूसरा साक्षात्कार 'विशाल भारत' (जनवरी 1932 ई)  में 'प्रेमचंदजी के साथ दो दिन' नाम से प्रकाशित हुआ।  इसके उपरांत नवम्बर 1933 ई में पंडित श्रीराम का 'कबूतर' नामक साक्षात्कार प्रकाशित हुआ।   सन् 1947 में सतेंद्र ने साधना के माध्यम से निश्चित प्रश्नावली के माध्यम से गणमान्य साहित्यकारों के हस्ताक्षर प्रकाशित किए। भेंटवार्ता विधा पर पुस्तककार प्रकाशित सबसे महत्वपूर्ण कृति डॉ पदम सिंह शर्मा की 'मैं इन से मिला' दो भागों में 1952 ईस्वी में प्रकाशित हुई थी। साक्षात्कार विधा की सर्वमान्य स्वतंत्र रचना बेनीमाधव शर्मा कृत  'कविदर्शन' मानी गई है। 'संवाद चलता रहे'- पत्रकार कृपाशंकर चौबे द्वारा दिए गए 12 कवियों, 5 निबंधकारों, 12 कथा...

हिन्दी साहित्य के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

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  हिन्दी साहित्य के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर  1 काव्य के तत्व माने गए है -  दो 2 महाकाव्य के उदाहरण है -  रामचरित मानस, रामायण, साकेत, महाभारत, पदमावत, कामायनी, उर्वशी, लोकायतन, एकलव्य आदि 3 मुक्तक काव्य के उदाहरण है-  मीरा के पद, रमैनियां, सप्तशति 4 काव्य कहते है -  दोष रहित, सगुण एवं रमणियार्थ प्रतिपादक युगल रचना को 5 काव्य के तत्व है -  भाषा तत्व, बुध्दि या विचार तत्व, कल्पना तत्व और शैली तत्व 6 काव्य के भेद है -  प्रबंध (महाकाव्य और खण्ड काव्य), मुक्तक काव्य 7 वामन ने काव्य प्रयोजन माना - दृष्ट प्रयोजन (प्रीति आनंद की प्राप्ति) अदृष्ट प्राप्ति (कीर्ति प्राप्ति) 8 भामह की काव्य परिभाषा है -  शब्दार्थो सहित काव्यम 9 प्रबंध काव्य का शाब्दिक अर्थ है -  प्रकृष्ठ या विशिष्ट रूप से बंधा हुआ। 10 रसात्मक वाक्यम काव्यम परिभाषा है -  पंडित जगन्नाथ का 11 काव्य के कला पक्ष में निहित होती है -  भाषा 12 काव्य में आत्मा की तरह माना गया है-  रस 13 तद्दोषों शब्दार्थो सगुणावनलंकृति पुन: क्वापि, परिभाषा है - मम्मट की 14 काव्य के...

राजभाषा

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राजभाषा  14 सितम्बर, 1949 ई को भारत के संविधान में हिंदी को राजभाषा की मान्यता प्रदान की गई है।  भारतीय संविधान के भाग-17 में अनुच्छेद 343-351 तक राजभाषा का संविधान में प्रावधान किया गया है तथा संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता प्रदान की गई है – असमिया बंगला  बोडो  डोगरी  गुजराती  हिंदी  कन्नड़  कश्मीरी  कोंकणी मैथिली मलयालम मणिपुरी  मराठी नेपाली  उड़िया  पंजाबी  संस्कृत संथाली सिंधी  तमिल  तेलुगु उर्दू  मूल संविधान में 14 भाषाएँ थीं। संविधान (21वाँ संशोधन) अधिनियम, 1967 द्वारा सिंधी के जोड़े जाने पर यह संख्या 15 हो गई थी। 71वें संशोधन अधिनियम, 1992 से कोंकणी, नेपाली और मणिपुरी को सम्मिलित कर दिए जाने पर यह संख्या 18 हो गई है। 92वें संशोधन अधिनियम 2003 ने इसमें बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को सम्मिलित कर दिया है। जिससे अब यह संख्या बढ़कर 22 हो गई है। 

ऐसे मैं मन बहलाता हूँ (कविता)

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कविता - ऐसे मैं मन बहलाता हूँ  कवि - हरिवंशराय बच्चन कविता का आरंभ  सोचा करता बैठ अकेले, गत जीवन के सुख-दुख झेले, दंशनकारी सुधियों से मैं उर के छाले सहलाता हूँ! ऐसे मैं मन बहलाता हूँ! नहीं खोजने जाता मरहम, होकर अपने प्रति अति निर्मम, उर के घावों को आँसू के खारे जल से नहलाता हूँ! ऐसे मैं मन बहलाता हूँ! आह निकल मुख से जाती है, मानव की ही तो छाती है, लाज नहीं मुझको देवों में यदि मैं दुर्बल कहलाता हूँ! ऐसे मैं मन बहलाता हूँ! धन्यवाद 🙏

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

आज हम हिंदी की परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर करेंगे  हिंदी व्याकरण 100 महत्वपूर्ण प्रश्न हिंदी मानक वर्णमाला में कुल कितने वर्ण हैं? – 52 अंतस्थ व्यंजन की संख्या कितनी है? – 4 स्वरों की संख्या कितनी मानी गई है? – 11 हिंदी शब्द की व्युत्पत्ति कहां से हुई? – सिंधु से हिंदी वर्णमाला को कितने भागों में विभक्त किया गया है? – दो भागों में हिंदी वर्णमाला में स्पर्श व्यंजनों की संख्या कितनी है? – 25 मात्रा के आधार पर हिंदी स्वरों के दो भेद कौन-कौन से हैं? – हस्वर एवं दीर्घ हिंदी वर्णमाला में व्यंजनों की संख्या कितनी है? – 33 पंचतंत्र क्या है? – कहानी संग्रह इंदिरापति किसे कहा जाता है? – विष्णु को कबीरदास की भाषा कौन सी थी? – सधुक्कडी  प्रगतिवाद उपयोगितावाद का दूसरा नाम है यह किसका कथन है? – रामविलास शर्मा रामचरितमानस में कुल कितने कांड हैं? – सात हिंदी साहित्य के इतिहास के रचयिता है? – आचार्य रामचंद्र शुक्ल कलम का जादूगर किसे कहा जाता है? – रामवृक्ष बेनीपुरी गीत गोविंद किस भाषा में लिखा गया है? – संस्कृत भाषा में किसे लोकनायक कहा जाता है? – तुलसीदास जी को व...

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