स्कूल शिक्षा का भविष्य

स्कूल शिक्षा का भविष्य तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तनों और वैश्विक बदलावों के कारण बहुत ही रोमांचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। कुछ प्रमुख बदलाव जो आने वाले समय में हो सकते हैं, वे इस प्रकार हैं: प्रौद्योगिकी का उपयोग : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन शिक्षा, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का स्कूल शिक्षा में एक महत्वपूर्ण स्थान होगा। बच्चों को इंटरेक्टिव, कस्टमाइज्ड और पर्सनलाइज्ड शिक्षा मिल सकेगी। स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग, और आभासी कक्षाएं एक सामान्य तरीका बन सकती हैं। कौशल आधारित शिक्षा : भविष्य में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यावसायिक कौशल, समस्या सुलझाने की क्षमता, और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना होगा। ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे जो जीवन कौशल, संवाद कौशल, और प्रौद्योगिकियों के बारे में गहरे ज्ञान को शामिल करेंगे। समावेशी और व्यक्तिगत शिक्षा : शिक्षा में विविधता और समावेशिता पर जोर दिया जाएगा, ताकि सभी छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार शिक्षा मिल सके। इससे बच्चों के शैक्षिक और मानसिक विकास में मदद मिलेगी, चाहे वे किसी भी सामाजिक या भौगोलिक पृष्...

भेंटवार्ता (साक्षात्कार)

भेंटवार्ता (साक्षात्कार) 


भेंटवार्ता (साक्षात्कार) विधा का आरंभ पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से हुआ। 

हिंदी में इस विधा का सूत्रपात बनारसीदास चतुर्वेदी द्वारा हुआ। 

बनारसीदास चतुर्वेदी का 'विशाल भारत' (सितम्बर 1931 ई) 
में 'रत्नाकरजी से बातचीत ' शीर्षक साक्षात्कार प्रकाशित हुआ। 

बनारसीदास चतुर्वेदी का दूसरा साक्षात्कार 'विशाल भारत' (जनवरी 1932 ई)  में 'प्रेमचंदजी के साथ दो दिन' नाम से प्रकाशित हुआ। 

इसके उपरांत नवम्बर 1933 ई में पंडित श्रीराम का 'कबूतर' नामक साक्षात्कार प्रकाशित हुआ। 

 सन् 1947 में सतेंद्र ने साधना के माध्यम से निश्चित प्रश्नावली के माध्यम से गणमान्य साहित्यकारों के हस्ताक्षर प्रकाशित किए।

भेंटवार्ता विधा पर पुस्तककार प्रकाशित सबसे महत्वपूर्ण कृति डॉ पदम सिंह शर्मा की 'मैं इन से मिला' दो भागों में 1952 ईस्वी में प्रकाशित हुई थी।

साक्षात्कार विधा की सर्वमान्य स्वतंत्र रचना बेनीमाधव शर्मा कृत  'कविदर्शन' मानी गई है।

'संवाद चलता रहे'- पत्रकार कृपाशंकर चौबे द्वारा दिए गए 12 कवियों, 5 निबंधकारों, 12 कथाकारों और 4 आलोचकों के साक्षात्कारों का संग्रह है।



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