ईश्वर की मूर्ति

ईश्‍वर की मूर्ति प्रतापनारायण मिश्र वास्‍तव में ईश्‍वर की मूर्ति प्रेम है, पर वह अनिर्वचनीय, मूकास्‍वादनवत्, परमानंदमय होने के कारण लिखने वा कहने में नहीं आ सकता, केवल अनुभव का विषय है। अत: उसके वर्णन का अधिकार हमको क्या किसी को भी नहीं है। कह सकते हैं तो इतना ही कह सकते हैं कि हृदय मंदिर को शुद्ध करके उसकी स्‍थापना के योग्‍य बनाइए और प्रेम दृष्टि से दर्शन कीजिए तो आप ही विदित हो जाएगा कि वह कैसी सुंदर और मनोहर मूर्ति है। पर यत: यह कार्य सहज एवं शीघ्र प्राप्‍य नहीं है। इससे हमारे पूर्व पुरुषों ने ध्‍यान धारण इत्‍यादि साधन नियत कर रक्‍खे हैं जिनका अभ्‍यास करते रहने से उसके दर्शन में सहारा मिलता है। किंतु है यह भी बड़े ही भारी मस्तिष्‍कमानों का साध्‍य। साधारण लोगों से इसका होना भी कठिन है। विशेषत: जिन मतवादियों का मन भगवान् के स्‍मरण में अभ्‍यस्‍त नहीं है, वे जब आँखें मूँद के बैठते हैं तब अंधकार के अतिरिक्‍त कुछ नहीं देख सकते और उस समय यदि घर गृहस्‍थी आदि का ध्‍यान न भी करैं तौ भी अपनी श्रेष्‍ठता और अन्‍य प्रथावलंबियों की तुच्‍छता का विचार करते होंगे अथवा अपनी रक्षा वा मनोरथ सिद्धि इत्‍य...

व्याकरण

💐हिन्दी भाषा व्याकरण💐

हिन्दी शब्द–कोश में शब्दों का क्रम –
हिन्दी शब्द–कोश में शब्दों का क्रम विभिन्न
वर्णोँ के निम्न क्रम के अनुसार है–
अं, अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, क, क्ष, ख, ग, घ, च, छ, ज, ज्ञ, झ, ट, ठ, ड, ढ, त, त्र, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, श, ष, स, ह ।
इस प्रकार शब्द–कोश में सर्वप्रथम ‘अं’ या ‘अँ’ से प्रारंभ होने वाले शब्द होते हैं और अन्त में ‘ह’ से प्रारंभ होने वाले शब्द। प्रत्येक शब्द से प्रारंभ होने वाले शब्द भी हजारों की संख्या में होते हैं,
अतः शब्द–कोश में उनका क्रम–विन्यास
विभिन्न स्वरों की मात्राओँ के अग्र क्रम में
होता है–
ं ँ ा ि ी ु ू ृ े ै ो ौ ।
• उदाहरण –
1. आधा वर्ण उस वर्ण की ‘औ’ की मात्रा के
बाद आता है। जैसे– कटौती के बाद कट्टर, करौ के बाद कर्क, कसौ के बाद कस्त, कौस्तु के बाद क्य, क्योँ के बाद क्रं... क्र... क्ल... क्व आदि।
2. ‘ृ ’ की मात्रा ‘ऊ’ की मात्रा वाले वर्ण के
बाद आती है। जैसे– कूक, कूल के बाद कृत।

3. ‘क्ष’ वर्ण आधे ‘क्’ के बाद आता है। जैसे–
क्विँटल के बाद क्षण।

4. ‘ज्ञ’ अक्षर ‘जौ’ के अंतिम शब्द के बाद आता
है। जैसे– जौहरी के बाद ज्ञात।

5. ‘त्र’ अक्षर ‘त्यौ’ के बाद आयेगा। जैसे–
त्यौहार के बाद त्रय।

6. ‘श्र’ अक्षर ‘श्यो’ के बाद आयेगा क्योँकि
श्र=श्*र है तथा ‘र’ शब्द–कोश मेँ ‘य’ के बाद
आता है।

7. ‘द्य’ अक्षर ‘दौ’ के बाद आता है। जैसे–
दौहित्री के बाद द्युति।

8. अक्षर ‘रौ’ के बाद आता है। जैसे– सरौता के
बाद सर्कस एवं करौना के बाद कर्क।

9. अक्षर किसी भी व्यंजन के ‘य’ के साथ संयुक्त अक्षर के अंतिम शब्द के बाद आता है। जैसे–
प्योसार के बाद प्रकट, ग्यारह के बाद ग्रंथ, द्यौ
के बाद द्रव एवं ब्यौरा के बाद ब्रश।

इस प्रकार प्रत्येक वर्ण के सर्वप्रथम अनुस्वार (ं ) या चन्द्रबिन्दु (ँ ) वाले शब्द आते हैँ फिर उनका क्रम क्रमशः अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ की मात्रा के अनुसार होता है। ‘औ’ की मात्रा के बाद आधे अक्षर से प्रारंभ होने वाले शब्द दिये होते हैँ। 

उदाहरणार्थ– ‘क’ से प्रारंभ होने वाले शब्दोँ का क्रम निम्न प्रकार रहेगा–

कं, क, कां, किं, कि, कीं, कुं, कु, कूं, कू, कृं, कें, के, कैं, कै, कों, को, कौं, कौ, क् (आधा क) – क्या, क्रंद, क्रम आदि।

प्रत्येक शब्द में प्रथम अक्षर के बाद आने वाले
द्वितीय, तृतीय आदि अक्षरों का क्रम भी
उपर्युक्त प्रकार से ही होगा।

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