स्कूल शिक्षा का भविष्य

स्कूल शिक्षा का भविष्य तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तनों और वैश्विक बदलावों के कारण बहुत ही रोमांचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। कुछ प्रमुख बदलाव जो आने वाले समय में हो सकते हैं, वे इस प्रकार हैं: प्रौद्योगिकी का उपयोग : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन शिक्षा, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का स्कूल शिक्षा में एक महत्वपूर्ण स्थान होगा। बच्चों को इंटरेक्टिव, कस्टमाइज्ड और पर्सनलाइज्ड शिक्षा मिल सकेगी। स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग, और आभासी कक्षाएं एक सामान्य तरीका बन सकती हैं। कौशल आधारित शिक्षा : भविष्य में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यावसायिक कौशल, समस्या सुलझाने की क्षमता, और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना होगा। ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे जो जीवन कौशल, संवाद कौशल, और प्रौद्योगिकियों के बारे में गहरे ज्ञान को शामिल करेंगे। समावेशी और व्यक्तिगत शिक्षा : शिक्षा में विविधता और समावेशिता पर जोर दिया जाएगा, ताकि सभी छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार शिक्षा मिल सके। इससे बच्चों के शैक्षिक और मानसिक विकास में मदद मिलेगी, चाहे वे किसी भी सामाजिक या भौगोलिक पृष्...

आत्मकथ्य (जयशंकर प्रसाद)


आत्मकथ्य -
मधुप गुन-गुनाकर कह जाता कौन कहानी अपनी यह, मुरझाकर गिर रहीं पत्तियां देखो कितनी आज घनी।
इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्‍य जीवन-इतिहास यह लो, करते ही रहते हैं अपने व्यंग्य मलिन उपहास तब भी कहते हो-कह डालूं दुर्बलता अपनी बीती तुम सुनकर सुख पाओगे, 
देखोगे-यह गागर रीती। 
किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले- अपने को समझो, 
मेरा रस ले अपनी भरने वाले।
यह विडंबना! अरी सरलते हँसी तेरी उड़ाऊँ मैं 
भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।
उज्जवल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की अरे खिल-खिलाकर हँसने वाली उन बातों की। 
मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।जिसके अरूण-कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में 
उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की? 
छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ? 
क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ? सुनकर क्या तुम भला करोगे मेरी भोली आत्मकथा? अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मौन व्यथा. 

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