स्कूल शिक्षा का भविष्य

स्कूल शिक्षा का भविष्य तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तनों और वैश्विक बदलावों के कारण बहुत ही रोमांचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। कुछ प्रमुख बदलाव जो आने वाले समय में हो सकते हैं, वे इस प्रकार हैं: प्रौद्योगिकी का उपयोग : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन शिक्षा, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का स्कूल शिक्षा में एक महत्वपूर्ण स्थान होगा। बच्चों को इंटरेक्टिव, कस्टमाइज्ड और पर्सनलाइज्ड शिक्षा मिल सकेगी। स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग, और आभासी कक्षाएं एक सामान्य तरीका बन सकती हैं। कौशल आधारित शिक्षा : भविष्य में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यावसायिक कौशल, समस्या सुलझाने की क्षमता, और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना होगा। ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे जो जीवन कौशल, संवाद कौशल, और प्रौद्योगिकियों के बारे में गहरे ज्ञान को शामिल करेंगे। समावेशी और व्यक्तिगत शिक्षा : शिक्षा में विविधता और समावेशिता पर जोर दिया जाएगा, ताकि सभी छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार शिक्षा मिल सके। इससे बच्चों के शैक्षिक और मानसिक विकास में मदद मिलेगी, चाहे वे किसी भी सामाजिक या भौगोलिक पृष्...

मैथिलीशरण गुप्त, मैथिलीशरण गुप्त की महत्वपूर्ण रचनाएँ, महत्वपूर्ण तथ्य

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मैथिलीशरण गुप्त का जन्म चिरगांव झांसी सन् 1886 ई में हुआ। 

इनके पिता का नाम रामशरण दास और इन के गुरु का नाम महावीर प्रसाद द्विवेदी है।

इनकी प्रथम कविता 'हेमंत' 1905 ई में प्रकाशित हुई थी और प्रथम काव्य संग्रह 'रंग में भंग' 1999 ई में प्रकाशित हुआ।

इन्हें आधुनिक युग का 'तुलसी' भी स्वीकार किया गया है।

हिंदी साहित्य में 'रामचरितमानस' के बाद इनके द्वारा लिखा गया 'साकेत' को रामकाव्य का दूसरा स्तंभ माना जाता है।

मैथिली शरण गुप्त को 'साकेत' रचना की मूल प्रेरणा सन् 1988 ई में 'सरस्वती पत्रिका' में महावीर द्विवेदी के लेख कवियों की 'उर्मिला विषयक-उदासीनता' से मिली।

यह लेख महावीर प्रसाद द्विवेदी ने अपने छद्मनाम 'भुजंग भूषण भट्टाचार्य' नाम से प्रकाशित कराया।

साकेत शब्द मूलत: पालि भाषा का शब्द है जिसका अर्थ अयोध्या है।

साकेत में 12 सर्ग है

साकेत को डॉ नगेन्द्र ने 'जनवादी' काव्य कहा है 

आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी ने गुप्त जी को 'सामंजस्यवादी' कवि कहा है 

मैथिलीशरण गुप्त को भारत भारती रचना की मूल प्रेरणा 'मुसद्दसे हाली' तथा ब्रजमोहन दत्तात्रेय कैफी कृत 'भारत दर्पण' पुस्तक से प्राप्त हुई 

मैथिलीशरण गुप्त ने स्वयं को 'कौटुंबिक कविमात्र' कहा है।

इन्हें महात्मा गांधी ने 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी।

मैथिली शरण गुप्त द्वारा अनूदित काव्य प्लासी का युद्ध, मेघनाथ वध, वृत्र संहार है

मैथिलीशरण गुप्त बांग्ला कवि माइकल मधुसूदन दत्त की रचनाओं का 'मधुप' उपनाम से अनुवाद किया।

गुप्त जी ने मार्क्स की पुत्री 'जैनी' पर 'जयिनी' नामक काव्य लिखा है।

गुप्त जी को द्विवेदी काल में 'हरिगीतिका' छंद का बादशाह कहा जाता है।


मैथिली शरण गुप्त द्वारा रचित प्रमुख काव्य ग्रंथ निम्नलिखित हैं-
रंग में भंग 1909 ई
जयद्रथ वध 1910 ई
किसान 1917 ई
विकट भट 1929 ई
गुरुकुल 1929 ई
साकेत 1931 ई
भारत भारती 1912 ई
झंकार 1929 ई
यशोधरा 1932 ई
जय भारत 1952 ई
विष्णु प्रिया 1957 ई
सिद्धराज 1936 ई
हिंदू 1927
वैतालिक 
पंचवटी 1925

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