स्कूल शिक्षा का भविष्य

स्कूल शिक्षा का भविष्य तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तनों और वैश्विक बदलावों के कारण बहुत ही रोमांचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। कुछ प्रमुख बदलाव जो आने वाले समय में हो सकते हैं, वे इस प्रकार हैं: प्रौद्योगिकी का उपयोग : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन शिक्षा, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का स्कूल शिक्षा में एक महत्वपूर्ण स्थान होगा। बच्चों को इंटरेक्टिव, कस्टमाइज्ड और पर्सनलाइज्ड शिक्षा मिल सकेगी। स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग, और आभासी कक्षाएं एक सामान्य तरीका बन सकती हैं। कौशल आधारित शिक्षा : भविष्य में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यावसायिक कौशल, समस्या सुलझाने की क्षमता, और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना होगा। ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे जो जीवन कौशल, संवाद कौशल, और प्रौद्योगिकियों के बारे में गहरे ज्ञान को शामिल करेंगे। समावेशी और व्यक्तिगत शिक्षा : शिक्षा में विविधता और समावेशिता पर जोर दिया जाएगा, ताकि सभी छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार शिक्षा मिल सके। इससे बच्चों के शैक्षिक और मानसिक विकास में मदद मिलेगी, चाहे वे किसी भी सामाजिक या भौगोलिक पृष्...

प्रपद्यवाद (नकेनवाद) (1956 ईस्वी)

प्रपद्यवाद (नकेनवाद)  (1956 ईस्वी) 

आपका हिंदी  साहित्य और लेखनकला में स्वागत.....

जैसाकि आपको जानकारी है  हिंदी में अनेक वाद उदाहरण के लिए छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद,  हालावाद इसी तरह एक अन्य वाद है प्रपद्यवाद। 

आज हम इसी वाद से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य पढ़ेगें

प्रपद्यवाद का प्रवर्तन नलिन विलोचन शर्मा ने सन् 1956 में प्रकाशित नकेन के प्रपद्यवाद संकलन से किया है।

प्रपद्यवाद को 'नकेनवाद' भी कहा जाता है क्योंकि इसमें बिहार के 3 कवि नलिन विलोचन शर्मा केसरी कुमार और नरेश के नाम के प्रथम अक्षरों को आधार मानकर बनता है।

प्रपद्यवाद और प्रयोगवाद में मूल अंतर यह है कि प्रपद्यवाद प्रयोग को साध्य मानता है जबकि प्रयोगवाद प्रयोग को साधन मानता है।

आचार्य नंददुलारे वाजपेई ने प्रपद्यवाद के संबंध में लिखा है नकेनवाद जिसे उसके हिमायतियों ने प्रपद्यवाद भी कहा है। वास्तव में प्रयोगशीलता का एक अतिवाद था।
प्रयोगवाद के प्रवक्ताओं ने जो कुछ नया कहा था उससे संतुष्ट ना होकर उसे तार्किक सीमा तक पहुंचाने का कार्य नकेन 1, नकेन 2  नामक संग्रह की भूमिका में दिखाई पड़ा था।

सन् 1952 में नरेश के संपादकत्व में प्रकाशित पत्रिका प्रकाश में नकेनवादियों ने तथाकथित प्रयोग-दश- सूत्री घोषित किया।

धन्यवाद 

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