स्कूल शिक्षा का भविष्य

स्कूल शिक्षा का भविष्य तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तनों और वैश्विक बदलावों के कारण बहुत ही रोमांचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। कुछ प्रमुख बदलाव जो आने वाले समय में हो सकते हैं, वे इस प्रकार हैं: प्रौद्योगिकी का उपयोग : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन शिक्षा, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का स्कूल शिक्षा में एक महत्वपूर्ण स्थान होगा। बच्चों को इंटरेक्टिव, कस्टमाइज्ड और पर्सनलाइज्ड शिक्षा मिल सकेगी। स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग, और आभासी कक्षाएं एक सामान्य तरीका बन सकती हैं। कौशल आधारित शिक्षा : भविष्य में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यावसायिक कौशल, समस्या सुलझाने की क्षमता, और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना होगा। ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे जो जीवन कौशल, संवाद कौशल, और प्रौद्योगिकियों के बारे में गहरे ज्ञान को शामिल करेंगे। समावेशी और व्यक्तिगत शिक्षा : शिक्षा में विविधता और समावेशिता पर जोर दिया जाएगा, ताकि सभी छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार शिक्षा मिल सके। इससे बच्चों के शैक्षिक और मानसिक विकास में मदद मिलेगी, चाहे वे किसी भी सामाजिक या भौगोलिक पृष्...

जुही की कली(कविता)

कविता-जुही की कली 

कवि- निराला 
विजन-वन-वल्लरी पर 

सोती थी सुहागभरी-स्नेह-स्वप्न-मग्न-

अमल-कोमल-तनु-तरुणी-जूही की कली
,
दृग बन्द किये, शिथिल-पत्रांक में। 



वासन्ती निशा थी;

विरह-विधुर-प्रिया-संग छोड़ 

किसी दूर देश में था पवन 

जिसे कहते हैं मलयानिल। 

आई याद बिछुड़ने से मिलन की वह मधुर बात
,
आई याद चाँदनी  की धुली  हुई आधी रात, 

आई याद कान्ता की कम्पित कमनीय गात,

फिर क्या? पवन 

उपवन-सर-सरित गहन-गिरि-कानन 

कुञ्ज-लता-पुंजों को पारकर 

पहुँचा जहां उसने की केलि 

कली-खिली-साथ। 

सोती थी,

जाने कहो कैसे प्रिय-आगमन वह?

नायक ने चूमे कपोल,

बोल उठी वल्लरी की लड़ी जैसे हिंडोल। 

इस पर भी जागी नहीं,

चूक-क्षमा मांगी नहीं,

निद्रालस बंकिम विशाल नेत्र मूंदे रही-

किम्वा मतवाली थी यौवन की मदिरा पिये 

कौन कहे?

निर्दय उस नायक ने 

निपट निठुराई की,

कि झोंकों की झड़ियों से 

सुन्दर सुकुमार देह सारी झकझोर डाली,

मसल दिये गोरे कपोल गोल,

चौंक पड़ी युवति-

चकित चितवन निज चारों ओर पेर,

हेर प्यारे की सेज पास,

नम्रमुख हंसी, खिली 

खेल रंग प्यारे संग। 

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