स्कूल शिक्षा का भविष्य

स्कूल शिक्षा का भविष्य तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तनों और वैश्विक बदलावों के कारण बहुत ही रोमांचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। कुछ प्रमुख बदलाव जो आने वाले समय में हो सकते हैं, वे इस प्रकार हैं: प्रौद्योगिकी का उपयोग : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन शिक्षा, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का स्कूल शिक्षा में एक महत्वपूर्ण स्थान होगा। बच्चों को इंटरेक्टिव, कस्टमाइज्ड और पर्सनलाइज्ड शिक्षा मिल सकेगी। स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग, और आभासी कक्षाएं एक सामान्य तरीका बन सकती हैं। कौशल आधारित शिक्षा : भविष्य में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यावसायिक कौशल, समस्या सुलझाने की क्षमता, और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना होगा। ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे जो जीवन कौशल, संवाद कौशल, और प्रौद्योगिकियों के बारे में गहरे ज्ञान को शामिल करेंगे। समावेशी और व्यक्तिगत शिक्षा : शिक्षा में विविधता और समावेशिता पर जोर दिया जाएगा, ताकि सभी छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार शिक्षा मिल सके। इससे बच्चों के शैक्षिक और मानसिक विकास में मदद मिलेगी, चाहे वे किसी भी सामाजिक या भौगोलिक पृष्...

द्रुत झरो जगत के जीर्ण पत्र(कविता)

कविता - द्रुत झरो जगत के जीर्ण पत्र!

कवि - सुमित्रानंदन पत्र

रचनाकाल - फरवरी 1934 है

प्रकाशन - युगांत (1935) और  पल्लवनि (1940) काव्य संग्रह में हुआ है

कविता 

द्रुत झरो जगत के जीर्ण पत्र! 

हे स्रस्त-ध्वस्त! हे शुष्क-शीर्ण! 

हिम-ताप-पीत, मधुवात-भीत, 

तुम वीत-राग, जड़, पुराचीन!! 

निष्प्राण विगत-युग! मृतविहंग!

जग-नीड़, शब्द औ' श्वास-हीन,

च्युत, अस्त-व्यस्त पंखों-से तुम

झर-झर अनन्त में हो विलीन!

कंकाल-जाल जग में फैले 

फिर नवल रुधिर,-पल्लव-लाली! 

प्राणों की मर्मर से मुखरित 

जीव की मांसल हरियाली! 

मंजरित विश्व में यौवन के

जग कर जग का पिक, मतवाली

निज अमर प्रणय-स्वर मदिरा से

भर दे फिर नव-युग की प्याली!

निष्कर्ष -  यह प्रगतिवादी कविता है ,
नवयुग निर्माण की भावना है कविता में ,
पुरानी मान्यताओं और विचारों को नष्ट करने बात कही है कविता में,
पुरानी  मान्यताएँ  जड़वत और निर्जीव हो गई है, 
परिवर्तन ही कवि का उद्देश्य है, 
नय युग के साथ चलने की बात कही कवि ने इस कविता में ।

धन्यवाद 🙏


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

शिवशंभू के चिट्ठे (निबंध), बालमुकुंद गुप्त

ईदगाह (प्रेमचंद)

मेरे राम का मुकुट भीग रहा है

निराशावादी (कविता)

हिंदी रचना पर आधारित फिल्में